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    भारत ने क्षेत्रीय सहयोग करार (आरसीए) की अध्यक्षता ग्रहण की; राष्ट्रीय प्रतिनिधियों की 48वीं बैठक नवी मुंबई में प्रारंभ

    Publish Date : May 21, 2026
    India Assumes Chair of RCA; 48th Meeting of National Representatives Commences in Navi Mumbai

    • भारत ने 2026 के लिए क्षेत्रीय सहयोग करार (आरसीए) की अध्यक्षता ग्रहण की है।
    • आरसीए के राष्ट्रीय प्रतिनिधियों (एनआरएम) की 48वीं बैठक नवी मुंबई में प्रारंभ हुई।
    • बैठक में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 17 देशों के 29 प्रतिनिधि और एएफआरए के प्रतिनिधिमंडल के तहत तीन अफ्रीकी देशों के 3 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
    • आरसीए संधारणीय विकास के लिए नाभिकीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण अनुप्रयोगों को बढ़ावा देता है।
    • डीएई ने ‘विश्व-बंधु भारत’ की मूल भावना के तहत क्षेत्रीय सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

    अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के क्षेत्रीय सहयोग करार (आरसीए) के अंतर्गत राष्ट्रीय प्रतिनिधियों (एनआरएम) की 48वीं बैठक नवी मुंबई, महाराष्ट्र में कल से प्रारंभ हुई। इस बैठक की मेजबानी परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई), भारत सरकार द्वारा 19 से 22 मई 2026 तक की जा रही है।

    उद्घाटन सत्र में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 17 सदस्य देशों के राष्ट्रीय प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और अधिकारियों के साथ-साथ आईएईए और आरसीए क्षेत्रीय कार्यालय (आरसीएआरओ) के प्रतिनिधियों और अफ्रीकी क्षेत्रीय सहयोग करार (एएफआरए) के तीन विशेष आमंत्रितों ने भाग लिया।

    बैठक की कार्यवाही के अंतर्गत भारत ने औपचारिक रूप से वर्ष 2026 के लिए आरसीए की अध्यक्षता ग्रहण की, जो नाभिकीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण अनुप्रयोगों के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग के साथ भारत की दीर्घकालिक भागीदारी में एक महत्वपूर्ण उपलब्‍धि है।

    इस अवसर पर संबोधित करते हुए श्री विवेक भसीन, निदेशक, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) ने सामाजिक और औद्योगिक विकास के लिए नाभिकीय ऊर्जा के शांतिपूर्ण अनुप्रयोगों में भारत के लंबे समय से बेदाग और शानदार कार्य-निष्‍पादन पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, खाद्य परिरक्षण,कृषि,विकिरण प्रौद्योगिकियों और पर्यावरणीय संधारणीयता जैसे प्रमुख राष्ट्र निर्माण क्षेत्रों में भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया।

    श्री राजीव केसवानी, प्रमुख, नाभिकीय नियंत्रण एवं आयोजना स्‍कंध (एनसीपीडब्ल्यू), डीएई ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से साझा विकासात्मक चुनौतियों के समाधान में क्षेत्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत द्वारा 48वें आरसीए एनआरएम की मेजबानी, एशिया और प्रशांत क्षेत्र में साझेदारी-आधारित वैज्ञानिक सहयोग के प्रति देश की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    भारत के राष्ट्रीय आरसीए प्रतिनिधि श्री पुष्पेंद्र कुमार शर्मा ने बैठक की कार्यसूची और कार्यवाही का संक्षिप्त विवरण दिया जिसमें आरसीए कार्यक्रम कार्यान्वयन, भविष्य की परियोजना का विकास, क्षेत्रीय सहयोग फ्रेमवर्क, आरसीए क्षेत्रीय कार्यालय की गतिविधियां और 70वीं आईएईए महासभा के दौरान आयोजित होने वाले अन्य कार्यक्रमों से संबंधित चर्चाएं शामिल थीं।

    श्री संपतकुमार रघुनाथन, राष्ट्रीय संपर्क अधिकारी (एनएओ) ने आरसीए के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए परिचयात्मक टिप्पणी प्रस्तुत की और अतिथि देवो भव: की भावना में निहित भारत की पारंपरिक आतिथ्य सत्कार की भावना को व्यक्त करते हुए प्रतिनिधियों का स्वागत किया, साथ ही सभी प्रतिभागी देशों और प्रतिनिधियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

    एनआरएम में स्वास्थ्य सेवा, नाभिकीय कृषि एवं खाद्य प्रौद्योगिकी, जल संसाधन प्रबंधन, विकिरण प्रौद्योगिकी, पर्यावरण संधारणीयता और क्षमता निर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों में वर्तमान में जारी और भावी सहयोगात्मक कार्यक्रमों पर चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम के भाग के रूप में, प्रतिनिधियों के लिए टाटा मेमोरियल सेंटर का कैंसर देखभाल, अनुसंधान और शिक्षण का प्रमुख केंद्र, एक्ट्रेक (कैंसर उपचार, अनुसंधान और शिक्षण का प्रगत केंद्र) का तकनीकी दौरा आयोजित किया गया। नाभिकीय ऊर्जा के गैर-विद्युत अनुप्रयोगों को प्रदर्शित करने के लिए प्रतिनिधियों और सामाजिक प्रासंगिकता के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत बीएआरसी के वैज्ञानिकों तथा इंजीनियरों के बीच संवाद स्थापित करने हेतु एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, समग्र कार्यक्रम के अंश के रूप में प्रतिनिधियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का अनुभव कराने के लिए एक सांस्कृतिक यात्रा की योजना बनाई गई है। एनआरएम के दौरान होने वाले विचार-विमर्श से इस वर्ष के अंत तक वियना में आयोजित होने वाली आईएईए की 70वीं महासभा में होने वाली चर्चाओं और सहयोगात्मक गतिविधियों में भी योगदान मिलेगा।

    वर्ष 2026 में भारत द्वारा आरसीए की अध्यक्षता करना साझा-संचालित क्षेत्रीय सहयोग और सामाजिक लाभ के लिए नाभिकीय ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के प्रति उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    भारत की विश्व-बंधु भावना और ‘इंडिया बाय योर साइड’ विषयवस्तु की प्रेरणा के साथ आरसीए की अध्यक्षता के दौरान भारत का दृष्टिकोण विज्ञान, नवाचार और साझा प्रगति के माध्यम से सदस्य देशों के बीच सहयोगात्मक मार्ग को और अधिक सुदृढ़ करना है।

    बैठक की कार्यसूची में तकनीकी चर्चा, आरसीए कार्यक्रम के कार्यान्वयन की समीक्षा, साझेदारीपरक भावी गतिविधियों पर विचार-विमर्श, 70वीं आईएईए महासभा के दौरान नियोजित सहभागिता कार्यक्रम, सांस्कृतिक गतिविधियाँ और तकनीकी दौरे शामिल हैं।

    आरसीए के संबंध में

    क्षेत्रीय सहयोग करार (आरसीए) अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के तत्वावधान में स्थापित एक अंतर-सरकारी फ्रेमवर्क है, जिसका उद्देश्य एशिया और प्रशांत महासागर क्षेत्र में नाभिकीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित सहयोगात्मक अनुसंधान, विकास और प्रशिक्षण को बढ़ावा देना है। यह करार वर्ष 1972 में लागू किया गया और वर्तमान में इसमें एशिया-प्रशांत महासागर क्षेत्र के 22 सदस्य देश शामिल हैं।

    आरसीए में भारत की भूमिका

    भारत ने आरसीए के विकास में इसकी स्थापना से ही एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आरसीए की संकल्पना वर्ष 1964 में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी), मुंबई में आयोजित आईएईए महासभा में चर्चा के दौरान की गई थी जिसमें पहली बार एशिया और प्रशांत महासागर क्षेत्र के लिए नाभिकीय विज्ञान में क्षेत्रीय सहयोग के संबंध में विचार प्रस्तावित किया गया था। आरसीए के संस्थापक सदस्य के रूप में, भारत ने वैज्ञानिक विशेषज्ञता, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, प्रौद्योगिकी प्रसार, विशेषज्ञ शिष्ट मंडल और संस्थागत साझेदारियों के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग में निरंतर योगदान दिया है।

    परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आने वाले भारतीय संस्थानों ने स्वास्थ्य सेवा, कृषि, आइसोटोप हाइड्रोलॉजी, विकिरण प्रौद्योगिकी, पर्यावरणीय अनुप्रयोगों और मानव संसाधन विकास में आरसीए कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से योगदान दिया है।

    भारत द्वारा वर्ष 2026 में आरसीए की अध्यक्षता करना नाभिकीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण अनुप्रयोगों द्वारा शांति, प्रगति और समृद्धि हेतु क्षेत्रीय साझेदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक नई प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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