Close

    केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भुवनेश्वर में ‘राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान’ (एनआईएसईआर) के 15वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए होमी भाभा की विरासत का स्मरण किया

    Publish Date : July 13, 2026
    Union Minister Dr. Jitendra Singh Addresses 15th Graduation Ceremony of 'National Institute of Science, Education & Research' (NISER) in Bhubaneswar; invokes legacy of Homi Bhabha

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग तथा अंतरिक्ष विभाग के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का नाभिकीय कार्यक्रम विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है, साथ ही उन्होंने युवा वैज्ञानिकों से डॉ. होमी जहांगीर भाभा द्वारा परिकल्पित वैज्ञानिक विरासत को आगे बढ़ाने तथा विकसित भारत 2047 एवं नेट जीरो के राष्ट्रीय लक्ष्यों में योगदान देने का आह्वान किया।

    राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईएसईआर), भुवनेश्वर के 15वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन किसी संस्थान में दीक्षांत समारोह केवल उपाधियां प्रदान करने से कहीं अधिक है; यह वैज्ञानिक उत्कृष्टता, नवाचार एवं राष्ट्रीय उत्तरदायित्व की विरासत को नई पीढ़ी को सौंपने का अवसर है।

    इस समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति; ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी; केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान; एनआईएसईआर के शासी बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. अजीत कुमार मोहान्‍ती; एनआईएसईआर के निदेशक एवं अकादमिक परिषद के अध्यक्ष प्रो. हीरेंद्र नाथ घोष; प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, संकाय सदस्य, अभिभावक एवं छात्र भी उपस्थित रहे। इंटीग्रेटेड एम.एससी., इंटीग्रेटेड एम.एससी.-पीएच.डी., एम.एससी. तथा पीएच.डी. कार्यक्रमों के अंतर्गत 260 छात्रों को उपाधियां प्रदान की गईं।

    उत्तीर्ण छात्रों को बधाई देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने समारोह में शामिल होने हेतु अपना बहुमूल्य समय देने के लिए उपराष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति की उपस्थिति ने न केवल संस्थान को सम्मानित किया है, बल्कि अपने वैज्ञानिक करियर की शुरुआत करने वाले सैकड़ों युवा मन को भी प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि अनेक छात्र इस यादगार अवसर को जीवन भर संजोकर रखेंगे तथा इस कार्यक्रम की तस्वीरों को अपनी शैक्षणिक यात्रा के एक महत्वपूर्ण क्षण के रूप में गर्व से सहेजकर रखेंगे।

    एनआईएसईआर जो परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता है, को एक प्रमुख संस्थान बताते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस प्रकार के संस्थान भारत की वैज्ञानिक विरासत के संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान में दीक्षांत समारोह वैज्ञानिकों की एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी को उत्तरदायित्व हस्तांतरित किए जाने का प्रतीक हैं, जो देश को वैज्ञानिक उत्कृष्टता एवं आत्मनिर्भरता की अपनी दीर्घकालिक परंपरा को बनाए रखने में सक्षम बनाता है।

    भारत के नाभिकीय कार्यक्रम के प्रणेता डॉ. होमी जहांगीर भाभा की परिकल्पना का स्मरण करते हुए मंत्री ने कहा कि जब देश का नाभिकीय कार्यक्रम आरंभ किया गया था, तब भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को लेकर संदेह व्याप्त था। इन आशंकाओं के बावजूद डॉ. भाभा ने दृढ़तापूर्वक घोषणा की थी कि भारत का नाभिकीय कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के प्रति समर्पित रहेगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह परिकल्पना समय की कसौटी पर खरी उतरी है तथा आज भी भारत की वैज्ञानिक यात्रा का मार्गदर्शन कर रही है।

    मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के नाभिकीय कार्यक्रम को पूर्णतः एक नए स्तर पर ले जाकर इस परिकल्पना को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए सुधारों ने अवसरों का विस्तार किया है, स्वदेशी क्षमताओं को सुदृढ़ किया है तथा नाभिकीय क्षेत्र में व्यापक भागीदारी हेतु नए मार्ग खोले हैं, जिससे रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और सुदृढ़ हुई है।

    देश के नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम की हाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश के पहले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के विकास के साथ भारत अपने नाभिकीय कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है, जो भारत की स्वदेशी वैज्ञानिक क्षमताओं की परिपक्वता को दर्शाती है तथा देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करती है।

    उत्तीर्ण छात्रों को सीधे संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 260 युवा स्नातकों का यह बैच विज्ञान-आधारित विकास के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण एवं नेट जीरो प्राप्ति की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोहरी राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाने का उत्तरदायित्व वहन करता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र अपने युवा वैज्ञानिकों की ओर न केवल तकनीकी उन्नति के लिए, बल्कि उभरती वैश्विक चुनौतियों के सतत समाधान खोजने के लिए भी आशा भरी नजरों से देखता है।

    मंत्री ने कहा कि भारत ने विगत दशक में अपने वैज्ञानिक एवं तकनीकी परिवेश को सुदृढ़ करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। केंद्रीय बजट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने चार दुर्लभ मृदा (रेयर अर्थ) कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की है, जिनमें से एक ओडिशा में तथा शेष तीन तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश एवं केरल में स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ये पहल भारत के रणनीतिक खनिज परिवेश को महत्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ करेंगी तथा भविष्य की उभरती प्रौद्योगिकियों को सहयोग प्रदान करेंगी।

    डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की वर्तमान स्थापित नाभिकीय विद्युत उत्पादन क्षमता 8,780 मेगावाट है तथा वर्ष 2032 तक इस क्षमता को बढ़ाकर 22,380 मेगावाट करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह विस्तार स्वच्छ एवं सतत विद्युत स्रोतों को अपनाते हुए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के देश के संकल्प को दर्शाता है।

    वर्तमान समय को भारत के विज्ञान क्षेत्र के लिए सर्वाधिक आशाजनक चरणों में से एक बताते हुए मंत्री ने कहा कि आज के युवा वैज्ञानिकों के समक्ष अभूतपूर्व स्तर एवं विविधता के अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि अनुसंधान, नवाचार, अग्रणी प्रौद्योगिकियां एवं उभरते वैज्ञानिक विषय देश के युवाओं के लिए नए मार्ग खोल रहे हैं, जिससे वैज्ञानिक करियर अपनाने के लिए यह एक रोमांचक समय बन गया है।

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस नीति ने अभिरुचि-आधारित एवं अंतर-विषयक अधिगम को प्रोत्साहित कर भारत के शिक्षा परिवेश में मूलभूत परिवर्तन किया है। पूर्व की पीढ़ियों के विपरीत, जो प्रायः पारंपरिक शैक्षणिक धाराओं तक सीमित रह जाती थीं, आज के छात्रों को अपनी रुचि, अभिरुचि एवं आकांक्षाओं के अनुरूप विषय चुनने की लचीलापन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि एनआईएसईआर जैसे संस्थानों ने अंतर-विषयक शिक्षा, नवाचार एवं अनुसंधान को अपने शैक्षणिक ढांचे में समाहित कर इस दृष्टिकोण को अपनाया है, जो एनईपी 2020 की भावना को पूर्णतः प्रतिबिंबित करता है।

    मंत्री ने कहा कि अपेक्षाकृत अल्प अवधि में ही एनआईएसईआर ने विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान के भारत के अग्रणी केंद्रों में अपनी पहचान स्थापित की है। उन्होंने उत्कृष्ट वैज्ञानिक प्रतिभा को पोषित करने में संस्थान के योगदान की सराहना की तथा कहा कि इसके पूर्व छात्र पहले से ही भारत एवं विदेश में अनुसंधान संस्थानों, अकादमिक जगत, रणनीतिक संगठनों एवं अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, जिससे विश्व स्तर पर देश की वैज्ञानिक प्रतिष्ठा सुदृढ़ हो रही है।

    उत्तीर्ण छात्रों को पुनः बधाई देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वे संस्थान से केवल शैक्षणिक उपाधियां ही नहीं, बल्कि विज्ञान के माध्यम से राष्ट्र की सेवा हेतु आवश्यक आत्मविश्वास, जिज्ञासा एवं प्रतिबद्धता भी लेकर जा रहे हैं। उनकी क्षमताओं में विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्नातक बैच भारत की समृद्ध वैज्ञानिक परंपरा को आगे बढ़ाना जारी रखेगा तथा एक नवोन्मेषी, आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण की दिशा में सार्थक योगदान देगा।